Thursday, 23 April 2015

नारायणी धाम का मंदिर।

जयपुर। राजस्थान के अलवर जिले में एक जगह ऐसी भी है, जहां से रहस्यमयी ढंग से सदियों से पानी निकल रहा है। यह पानी बहकर उतनी ही दूर तक जा रहा है, जहां तक एक ग्वाला दौड़कर जा सका था। इसके पीछे एक कहानी प्रचलित है। यह घटना भले ही 1100 साल पुरानी है, लेकिन आज भी जीवंत है, क्योंकि पानी की धार लगातार उतनी ही बनी हुई है। न धार की दिशा बदली है न जगह। न वह स्थान बदला है, जहां तक पानी बहता हुआ जाता है। यही नहीं, यह भी है कि जहां तक पानी जाता है, उसके बाद कहां चला जाता है, आज तक कोई जान नहीं सका। यह सच्चाई है सरिस्का के वन क्षेत्र से घिरे धार्मिक क्षेत्र नारायणी धाम की। तिलवाड़ गांव के नजदीक इस नारायणी धाम को सैन समाज का पवित्र धार्मिक स्थल माना जाता है, वे इसे कुलदेवी मानते हैं, लेकिन यहां सभी वर्ग-समाज के लोग दर्शन के लिए आते हैं। सती कर्मवती के इस मंदिर में पूर्व में हर साल मेला भी लगता था, लेकिन दिवराला सती कांड के बाद से यहां प्रशासन ने मेला बंद करा दिया। हम यहां कर्मवती के सती होने का जिक्र जरूर करेंगे, लेकिन इसके पीछे की कहानी को ही बताना हमारा उद्देश्य है, सती का महिमामंडन करना नहीं। क्या है लोक मान्यता : सरिस्का के वन क्षेत्र के पास जंगलों से घिरे वरवा की डूंगरी की तलहटी में स्थित नारायणी माता का मंदिर मेवात के प्रमुख लोक तीर्थ स्थलों में गिना जाता है। लोक मान्यता के अनुसार 1016 में सैन समाज की महिला कर्मवती शादी के बाद विदाई होने पर पति के साथ ससुराल जा रही थी। रास्ते में एक बड़ के पेड़ के नीचे विश्राम के दौरान पति को सांप ने काट लिया। उसकी मृत्यु हो गई। ससुराल पहुंचने से पहले ही हुई इस घटना पर कर्मवती ने सोचा कि जब पति ही नहीं है तो ससुराल कैसा। ऐसे में उसने फैसला किया कि वह पति की चिता के साथ ही भस्म हो जाएगी। यह कोई चमत्कार से कम नहीं : कर्मवती वहां चिता के लिए लकड़ियों का इंतजाम करने में जुट गई। उन्होंने लकड़ी काटने वाले ग्वालों को देखा तो उनसे चिता के लिए लकड़ी देने की गुजारिश की। ग्वालों ने उनसे पूछा कि लकड़ी का आप क्या करोगी? तो उन्होंने कहा कि मुझे पति के साथ चिता में भस्म होना है। ग्वालाें ने कहा कि आपके ऐसा करने से इस क्षेत्र को आप वरदान दे जाइए। यहां पानी की किल्लत है। हमारे जानवरों को कई बार प्यासा रहना पड़ता है। । कर्मवती ने उन्हें वरदान दिया और कहा कि मेरी चिता की जलती लकड़ी को लेकर आगे बढ़ते रहना, लेकिन पीछे मत देखना। जैसे ही तुम पीछे देखोगे पानी वहीं रुक जाएगा लेकिन ग्वालों ने उनकी बात नहीं मानी और कुछ दूर जाने के बाद सती के हाल जानने के लिए जैसे ही उन्होंने पीछे देखा, पानी वहीं रुक गया। कहा जाता है कि मंदिर के पास आज भी वह जगह है जिसमें रहस्यमयी ढंग से पानी निकलता रहता है। यह जगह मंदिर से थोड़ी ही दूर है। यह पानी लगभग एक किलोमीटर दूर जाकर रुकता है। तब से इस जगह को श्रद्धा स्थल के रूप में जाना जाता है। यह मंदिर 11वीं सदी का और प्रतिहार शैली में बना हुआ है। हालांकि इसकी पूजा को लेकर कई बार मीणा और नाई जाति के लोगों के बीच टकराव की स्थिति बनी रहती है।

Saturday, 18 April 2015

लगातार एक दिशा में बढ़े, सफलता आपके कदम चूमेगी

“लगातार एक दिशा में बढ़े, सफलता आपके कदम चूमेंगी ” आज जिन्दगी की रफ्तार, बहुत तेज हो गयी है। युवा पीढ़ी तेजी से सफलता प्राप्त करना चाहती है। यदि किसी काम का रिजल्ट/परिणाम निश्चित समय में नहीं मिलता है तो वे उसे छोड़कर दूसरे काम को पकड़ लेते हैं। दूसरे काम में भी उन्हें आशा अनुरूप सफलता नहीं मिली तो वे तीसरा काम पकड़ लेते हैं। इसी तरह से अपने कार्य व शैली बदलते रहते है । इक्के-दुक्के ऐसे लोग कार्य में बहुत अधिक सफल होते हैं पर अधिकतम लोग थक-हार कर सामान्य सफलता अथवा अपनी योग्यता के अनुसार काम पाकर अपनी जिन्दगी गुजारने के लिए मजबूर हो जाते हैं। बचपन में पढ़ी गयी “ ईसप कथाओं ” की सबसे पहली कहानी में लगातार एक दिशा में किये गये कार्य के महत्व को समझाया गया था। उसमें “ईसप” ने बताया था कि कैसे स्कूल से भागने वाला व फेल होने वाला लड़का एक घटना के कारण एक सफल व्यक्ति सफल लेखक बना। उसमें बताया गया था कि पढ़ाई से थक-हार कर स्कूल से भागकर निराश एक लड़का गांव के कुएं के पास बैठा रहता है। अचानक वह देखता है कि कुएं की पत्थर की परिधि में कई गहरे निशान बने हुए हैं। फिर वह देखता है की पत्थर पर वह निशान कुएं से पानी निकालने वाली रस्सी के आने-जाने से बनी है। वह हैरान हो जाता है की रस्सी इतनी कमजोर और पत्थर इतने कठोर, फिर निशान कैसा ? फिर समझ जाता है कि लगातार रस्सी के आने-जाने से पत्थर पर भी निशान आ सकता है। आजकल योग्य व्यक्ति एक ही दिशा में लगातार कार्य करने की क्षमता खोने लगे हैं। राह में थोड़ी भी रूकावट उनके कार्य की दिशा बदल देती है। सफलता की ऊॅंची मंजिलें पाना है तो बाधाएं तो आयेंगी ही उन्हें दूर करने के लिए लगातार प्रयास करने होंगें। निरूत्साहित होने से बात नहीं बनेगी । हम निर्माण कार्य में पत्थर की तोड़ाई देखते हैं । पत्थर को तोड़ने के लिए एक ही जगह पर 10-15 बार घन मारना होता है, तभी वह टूटता है। पाँचवी-छठवी बार तक तो उसमें बाहरी रूप से कोई क्रेक या दरारें दिखाई नही देती है। यदि कोई व्यक्ति पहले पत्थर को 3 बार घन मारकर दूसरा पत्थर तोड़ने लगे तो शाम तक शायद एक पत्थर नहीं तोड़ पायेंगें। (एक-दो कच्चे पत्थर टूट भी सकते हैं) लगभग यही स्थिति कार्य सफलता के प्रथम प्रयास, द्वितीय प्रयास तथा लगातार प्रयास ना करने पर हो सकती है । छोटी-छोटी असफलताएं बड़ी सफलता में बदली जा सकती है तथा बड़ी असफलता बहुत बड़ी सफलता में बदली जा सकती है। बस हम सही दिशा में लगातार प्रयास करते रहें। बहुत सारी उपलब्धियॉ एक साथ पाने की चाहत अथवा एक कार्य से शीघ्रता शीघ्र फल की चाह व्यक्ति में बेहद तनाव पैदा कर देती है। यह तनाव उल्टे आदमी की कार्य क्षमता कम कर देता है। एक बार राजा को अपने लिए एक अतिविश्वसनीय सेनापति की जरूरत थी। उसने चार योग्य पुरूषों का चयन किया, जिनका काम महल की बावड़ी से पानी लाकर एक ड्रम भरना था। प्रत्येक को पानी निकालने के लिए बांस की बेंत से बनी बाल्टी दी गयी। जब बावड़ी से पानी खिंचा जाता है, बाल्टी ऊपर आते तक उसमें केवल 2 चुल्लु पानी रह जाता है वह भी 2-4 कदम चलने पर रिस जाता है । पहले व्यक्ति ने 10-12 बार प्रयास किया और यह कह कर बैठ गया कि राजा ने असम्भव कार्य दिया है। दूसरा व्यक्ति 1/2 घंटे तक प्रयास करते रहा और उसे भी पहले व्यक्ति की बात सही लगने लगी । वह भी पहले व्यक्ति के पास गया। तीसरा और चौथा व्यक्ति लगातार प्रयास करते रहे। लगातार प्रैक्टिस से कुएं से लगभग 40-50 कदम तक चलने पर बाल्टी खाली हो जाती थी। सैकड़ों बार भी प्रयास के बाद तीसरे व्यक्ति ने भी हिम्मत छोड़ दी। वह अन्य दो के पास बैठ गया। चौथे व्यक्ति ने प्रयास नहीं छोड़ा उसे विश्वास था राजा ने सम्भव कार्य दिया है। लगातार करने से ही सफलता मिलेगी दोपहर बाद उसने देखा की बांस की बेंत फूलने लगी है और छोटे छिद्र बंद होते जा रहे हैं और पानी ज्यादा दूरी तक ले जाया जा सकता है। शाम होते तक बांस की बेंत फूल गयी और पानी का रिसना बहुत कम हो गया। उस बाल्टी से कुछ पानी ड्रम में डाला जा सका। रात होते तक पानी का ड्रम भर गया और उस चौथे व्यक्ति को राजा द्वारा सेनापति नियुक्त कर दिया गया। सामान्य योग्यता वालों में भी निरन्तर प्रयास करने वाला व्यक्ति आगे बढ़ जाता है। आपमें योग्यता है, आप सफलता पाना चाहते है, और आपने सोच समझकर अपनी क्षमतानुसार कार्य की दिशा चुनी है तो कार्य में छोटी -बड़ी रूकावट आ सकती है निराश ना हों हिम्मत रखें। लगातार एक दिशा में बढ़े, सफलता आपके कदम चूमेंगी मधुर चितलांग्या